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ठाकुर जी के अनुसार, ईश्वर से विमुख होना ही अशांति की जड़ है। जब जीवन में आध्यात्मिकता नहीं होती, तो इंसान भौतिक सुखों के पीछे भागकर अपना मानसिक सुकून खो देता है।

5. लक्ष्यहीनता और आलस्य (Laziness) ठाकुर जी के अनुसार

जब व्यक्ति के भीतर 'मैं' का भाव आ जाता है और वह खुद को सबसे ऊपर समझने लगता है, तो उसका पतन निश्चित है। अहंकार इंसान को सीखने और सुधरने से रोकता है। ठाकुर जी के अनुसार

महाराज जी अक्सर कहते हैं कि इंसान वैसा ही बनता है जैसी उसकी सोहबत होती है। गलत दोस्तों या नकारात्मक लोगों के साथ रहने से बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है, जो अंततः पतन का कारण बनती है। ठाकुर जी के अनुसार